(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 10 (20 Slokas)

(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 10 (20 Slokas)

Chanakya Niti Shlokas with Meaning: This is the first chapter (अध्याय १) of Chanakya Niti (चाणक्य नीति) written by Acharya Chanakya Pandit, in which there are 20 shlokas. The slokas in Sanskrit, the meaning of shlokas and translation of all slokas in Hindi, English(चाणक्य नीति श्लोक अर्थ सहित). Here you can find Chanakya Neeti sastra shlokas in Sanskrit, Hindi, and find videos too. (चाणक्य नीति श्लोक संस्कृत में, चाणक्य नीति श्लोक हिंदी में, चाणक्य नीति श्लोक वीडियो). Download Chanakya Niti Chapter 10 PDF in Sanskrit, Hindi, and English with meaning from here.

Chanakya Niti Shlokas (चाणक्य नीति श्लोक)

धनहीनो न हीनश्च धनिकः स सुनिश्चयः ।
विद्यारत्नेन हीनो यः स हीनः सर्ववस्तुषु ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 1)

Meaning in English

One destitute of wealth is not destitute, he is indeed rich (if he is
learned); but the man devoid of learning is destitute in every way.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिसके पास धन नहीं है वो गरीब नहीं है, वह तो असल में रहीस है, यदि उसके पास विद्या है. लेकिन जिसके पास विद्या नहीं है वह तो सब प्रकार से निर्धन है.

दृष्टिपूतं न्यसेत्पादं वस्त्रपूतं पिबेज्जलम् ।
शास्त्रपूतं वदेद्वाक्यः मनःपूतं समाचरेत् ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 2)

Meaning in English

We should carefully scrutinise that place upon which we step (having
it ascertained to be free from filth and living creatures like insects,
etc.); we should drink water which has been filtered (through a clean
cloth); we should speak only those words which have the sanction of
the satras; and do that act which we have carefully considered.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हम अपना हर कदम फूक फूक कर रखे. हम छाना हुआ जल पिए. हम वही बात बोले जो शास्त्र सम्मत है. हम वही काम करे जिसके बारे हम सावधानीपुर्वक सोच चुके है.

सुखार्थी चेत्त्यजेद्विद्यां विद्यार्थी चेत्त्यजेत्सुखम् ।
सुखार्थिनः कुतो विद्या सुखं विद्यार्थिनः कुतः ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 3)

Meaning in English

He who desires sense gratification must give up all thoughts of
acquiring knowledge; and he who seeks knowledge must not hope for
sense gratification. How can he who seeks sense gratification acquire
knowledge, and he who possesses knowledge enjoy mundane sense
pleasure?

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिसे अपने इन्द्रियों की तुष्टि चाहिए, वह विद्या अर्जन करने के सभी विचार भूल जाए. और जिसे ज्ञान चाहिए वह अपने इन्द्रियों की तुष्टि भूल जाये. जो इन्द्रिय विषयों में लगा है उसे ज्ञान कैसा, और जिसे ज्ञान है वह व्यर्थ की इन्द्रिय तुष्टि में लगा रहे यह संभव नहीं

कवयः किं न पश्यन्ति किं न भक्षन्ति वायसाः ।
मद्यपाः किं न जल्पन्ति किं न कुर्वन्ति योषितः ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 4)

Meaning in English

What is it that escapes the observation of poets? What is that act
women are incapable of doing? What will drunken people not prate?
What will not a crow eat?

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह क्या है जो कवी कल्पना में नहीं आ सकता. वह कौनसी बात है जिसे करने में औरत सक्षम नहीं है. ऐसी कौनसी बकवास है जो दारू पिया हुआ आदमी नहीं करता. ऐसा क्या है जो कौवा नहीं खाता.

रङ्कं करोति राजानं राजानं रङ्कमेव च ।
धनिनं निर्धनं चैव निर्धनं धनिनं विधिः ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 5)

Meaning in English

Fate makes a beggar a king and a king a beggar. He makes a rich man
poor and a poor man rich.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

नियति एक भिखारी को राजा और राजा को भिखारी बनाती है. वह एक अमीर आदमी को गरीब और गरीब को अमीर.

येषां न विद्या न तपो न दानं
ज्ञानं न शीलां न गुणो न धर्मः ।
ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता
मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 6)

Meaning in English

The beggar is a miser’s enemy; the wise counsellor is the fool’s
enemy; her husband is an adulterous wife’s enemy; and the moon is
the enemy of the thief

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

भिखारी यह कंजूस आदमी का दुश्मन है. एक अच्छा सलाहकार एक मुर्ख आदमी का शत्रु है. वह पत्नी जो पर पुरुष में रूचि रखती है, उसके लिए उसका पति ही उसका शत्रु है. जो चोर रात को काम करने निकलता है, चन्द्रमा ही उसका शत्रु है.

ते मर्त्यलोके भुवि भारभूता
मनुष्यरूपेण मृगाश्चरन्ति ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka7 )

Meaning in English

Those who are destitute of learning, penance, knowledge, good
disposition, virtue and benevolence are brutes wandering the earth in
the form of men. They are burdensome to the earth.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिनके पास यह कुछ नहीं है… विद्या. तप. ज्ञान. अच्छा स्वभाव. गुण. दया भाव. …वो धरती पर मनुष्य के रूप में घुमने वाले पशु है. धरती पर उनका भार है.


अन्तःसारविहीनानामुपदेशो न जायते ।
मलयाचलसंसर्गान्न वेणुश्चन्दनायते ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 8)

Meaning in English

Those that are empty-minded cannot be benefited by instruction.
Bamboo does not acquire the quality of sandalwood by being
associated with the Malaya Mountain.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिनके भेजे खाली है, वो कोई उपदेश नहीं समझते. यदि बास को मलय पर्वत पर उगाया जाये तो भी उसमे चन्दन के गुण नहीं आते.


यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम् ।
लोचनाभ्यां विहीनस्य दर्पणः किं करिष्यति ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 9 )

Meaning in English

What good can the scriptures do to a man who has no sense of his
own? Of what use is as mirror to a blind man?

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिसे अपनी कोई अकल नहीं उसकी शास्त्र क्या भलाई करेंगे. एक अँधा आदमी आयने का क्या करेगा.


दुर्जनं सज्जनं कर्तुमुपायो नहि भूतले ।
अपानं शातधा धौतं न श्रेष्ठमिन्द्रियं भवेत् ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 10)

Meaning in English

Nothing can reform a bad man, just as the posterious cannot become a
superior part of the body though washed one hundred times.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

एक बुरा आदमी सुधर नहीं सकता. आप पृष्ठ भाग को चाहे जितना साफ़ करे वो श्रेष्ठ भागो की बराबरी नहीं कर सकता.

=

आप्तद्वेषाद्भवेन्मृत्युः परद्वेषाद्धनक्षयः ।
राजद्वेषाद्भवेन्नाशो ब्रह्मद्वेषात्कुलक्षयः ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 11)

Meaning in English

By offending a kinsman, life is lost; by offending others, wealth is
lost; by offending the king, everything is lost; and by offending a
brahmana one’s whole family is ruined.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

अपने निकट संबंधियों का अपमान करने से जान जाती है. दुसरो का अपमान करने से दौलत जाती है. राजा का अपमान करने से सब कुछ जाता है. एक ब्राह्मण का अपमान करने से कुल का नाश हो जाता है.


वरं वनं व्याघ्रगजेन्द्रसेवितं
द्रुमालयं पत्रफलाम्बुसेवनम् ।
तृणेषु शय्या शतजीर्णवल्कलं
न बन्धुमध्ये धनहीनजीवनम् ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 12)

Meaning in English

It is better to live under a tree in a jungle inhabited by tigers and
elephants, to maintain oneself in such a place with ripe fruits and
spring water, to lie down on grass and to wear the ragged barks of
trees than to live amongst one’s relations when reduced to poverty.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यह बेहतर है की आप जंगल में एक झाड के नीचे रहे, जहा बाघ और हाथी रहते है, उस जगह रहकर आप फल खाए और जलपान करे, आप घास पर सोये और पुराने पेड़ो की खाले पहने. लेकिन आप अपने सगे संबंधियों में ना रहे यदि आप निर्धन हो गए है.


विप्रो वृक्षस्तस्य मूलं च सन्ध्या
वेदः शाखा धर्मकर्माणि पत्रम् ।
तस्मान्मूलं यत्नतो रक्षणीयं
छिन्ने मूले नैव शाखा न पत्रम् ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 13)

Meaning in English

The brahmana is like tree; his prayers are the roots, his chanting of
the Vedas are the branches, and his religious act are the leaves.
Consequently effort should be made to preserve his roots for if the
roots are destroyed there can be no branches or leaves.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

ब्राह्मण एक वृक्ष के समान है. उसकी प्रार्थना ही उसका मूल है. वह जो वेदों का गान करता है वही उसकी शाखाए है. वह जो पुण्य कर्म करता है वही उसके पत्ते है. इसीलिए उसने अपने मूल को बचाना चाहिए. यदि मूल नष्ट हो जाता है तो शाखाये भी ना रहेगी और पत्ते भी.

माता च कमला देवी पिता देवो जनार्दनः ।
बान्धवा विष्णुभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 14)

Meaning in English

My mother is Kamala devi (Lakshmi), my father is Lord Janardana
(Vishnu), my kinsmen are the Vishnu-bhaktas (Vaisnavas) and, my
homeland is all the three worlds.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

लक्ष्मी मेरी माता है. विष्णु मेरे पिता है. वैष्णव जन मेरे सगे सम्बन्धी है. तीनो लोक मेरा देश है.


एकवृक्षसमारूढा नानावर्णा विहङ्गमाः ।
प्रभाते दिक्षु दशसु यान्ति का तत्र वेदना ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 15 )

Meaning in English

(Through the night) a great many kinds of birds perch(Sit and rest) on
a tree but in the morning they fly in all the ten directions. Why should
we lament (Expression of sorrow) for that? (Similarly, we should not
grieve when we must inevitably part company from our dear ones).

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

रात्रि के समय कितने ही प्रकार के पंछी वृक्ष पर विश्राम करते है. भोर होते ही सब पंछी दसो दिशाओ में उड़ जाते है. हम क्यों भला दुःख करे यदि हमारे अपने हमें छोड़कर चले गए.


बुद्धिर्यस्य बलं तस्य निर्बुद्धेश्च कुतो बलम् ।
वने सिंहो यदोन्मत्तः मशकेन निपातितः ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 16 )

Meaning in English

He who possesses intelligence is strong; how can the man that is
unintelligent be powerful? The elephant of the forest having lost his
senses by intoxication was tricked into a lake by a small rabbit. (this
verse refers to a famous story from the niti-sastra called pancatantra
compiled by the pandit Vishnusharma 2500 years ago).

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिसके पास में विद्या है वह शक्तिशाली है. निर्बुद्ध पुरुष के पास क्या शक्ति हो सकती है? एक छोटा खरगोश भी चतुराई से मदमस्त हाथी को तालाब में गिरा देता है.


का चिन्ता मम जीवने यदि हरिर्विश्वम्भरो गीयते
नो चेदर्भकजीवनाय जननीस्तन्यं कथं निर्ममे ।
इत्यालोच्य मुहुर्मुहुर्यदुपते लक्ष्मीपते केवलं
त्वत्पादाम्बुजसेवनेन सततं कालो मया नीयते ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 17 )

Meaning in English

Why should I be concerned for my maintenance while absorbed in
praising the glories of Lord Vishwambhara (Vishnu), the supporter of
all. Without the grace of Lord Hari, how could milk flow from a
mother’s breast for a child’s nourishment? Repeatedly thinking only in
this way, O Lord of the Yadus, O husband of Lakshmi, all my time is
spent in serving Your lotus feet.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हे विश्वम्भर तू सबका पालन करता है. मै मेरे गुजारे की क्यों चिंता करू जब मेरा मन तेरी महिमा गाने में लगा हुआ है. आपके अनुग्रह के बिना एक माता की छाती से दूध नहीं बह सकता और शिशु का पालन नहीं हो सकता. मै हरदम यही सोचता हुआ, हे यदु वंशियो के प्रभु, हे लक्ष्मी पति, मेरा पूरा समय आपकी ही चरण सेवा में खर्च करता हू.


गीर्वाणवाणीषु विशिष्टबुद्धि-
स्तथापि भाषान्तरलोलुपोऽहम् ।
यथा सुधायाममरेषु सत्यां
स्वर्गाङ्गनानामधरासवे रुचिः ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 18 )


अन्नाद्दशगुणं पिष्टं पिष्टाद्दशगुणं पयः ।
पयसोऽष्टगुणं मांसां मांसाद्दशगुणं घृतम् ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 19)


शोकेन रोगा वर्धन्ते पयसा वर्धते तनुः ।
घृतेन वर्धते वीर्यं मांसान्मांसं प्रवर्धते ॥

Chanakya Neeti (Chap. 10 – Sloka 20)

Go to Other Chapter (किसी और अध्याय चुनिए) >>

Leave a Reply