(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 13 (21 Slokas)

(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 13 (21 Slokas)

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Chanakya Niti Shlokas (चाणक्य नीति श्लोक)

मुहूर्तमपि जीवेच्च नरः शुक्लेन कर्मणा ।
न कल्पमपि कष्टेन लोकद्वयविरोधिना ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 1 )

Meaning in English

A man may live but for a moment, but that moment should be spent in
doing auspicious deeds. It is useless living even for a kalpa (4,320,000
*1000 years) and bringing only distress upon the two worlds (this world
and the next).

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि आदमी एक पल के लिए भी जिए तो भी उस पल को वह शुभ कर्म करने में खर्च करे. एक कल्प तक जी कर कोई लाभ नहीं. दोनों लोक इस लोक और पर-लोक में तकलीफ होती है.


गते शोको न कर्तव्यो भविष्यं नैव चिन्तयेत् ।
वर्तमानेन कालेन वर्तयन्ति विचक्षणाः ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 2)

Meaning in English

We should not fret for what is past, nor should we be anxious about the
future; men of discernment deal only with the present moment.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हम उसके लिए ना पछताए जो बीत गया. हम भविष्य की चिंता भी ना करे. विवेक बुद्धि रखने वाले लोग केवल वर्तमान में जीते है.


स्वभावेन हि तुष्यन्ति देवाः सत्पुरुषाः पिता ।
ज्ञातयः स्नानपानाभ्यां वाक्यदानेन पण्डिताः ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 3)

Meaning in English

It certainly is nature of the demigods, men of good character, and
parents to be easily pleased. Near and distant relatives are pleased when
they are hospitably received with bathing, food, and drink; and pandits
are pleased with an opportunity for giving spiritual discourse.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यह देवताओ का, संत जनों का और पालको का स्वभाव है की वे जल्दी प्रसन्न हो जाते है. निकट के और दूर के रिश्तेदार तब प्रसन्न होते है जब उनका आदर सम्मान किया जाए. उनके नहाने का, खाने पिने का प्रबंध किया जाए. पंडित जन जब उन्हें अध्यात्मिक सन्देश का मौका दिया जाता है तो प्रसन्न होते है.


आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ।
पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 4)

Meaning in English

Even as the unborn babe is in the womb of his mother, these five are
fixed as his life destiny: his life span, his activities, his acquisition of
wealth and knowledge, and his time of death.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है तो यह पाच बाते तय हो जाती है… १. कितनी लम्बी उम्र होगी. २. वह क्या करेगा ३. और ४. कितना धन और ज्ञान अर्जित करेगा. ५. मौत कब होगी.


अहो बत विचित्राणि चरितानि महात्मनाम् ।
लक्ष्मीं तृणाय मन्यन्ते तद्भारेण नमन्ति च ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 5)

Meaning in English

O see what a wonder it is! The doings of the great are strange: they treat
wealth as light as a straw, yet, when they obtain it, they bend under its
weight.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

देखिये क्या आश्चर्य है? बड़े लोग अनोखी बाते करते है. वे पैसे को तो तिनके की तरह मामूली समझते है लेकिन जब वे उसे प्राप्त करते है तो उसके भार से और विनम्र होकर झुक जाते है.


यस्य स्नेहो भयं तस्य स्नेहो दुःखस्य भाजनम् ।
स्नेहमूलानि दुःखानि तानि त्यक्त्वा वसेत् सुखम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 6)

Meaning in English

He who is overly attached to his family members experiences fear and
sorrow, for the root of all grief is attachment. Thus one should discard
attachment to be happy.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो व्यक्ति अपने घर के लोगो से बहोत आसक्ति रखता है वह भय और दुःख को पाता है. आसक्ति ही दुःख का मूल है. जिसे सुखी होना है उसे आसक्ति छोडनी पड़ेगी.


अनागतविधाता च प्रत्युत्पन्नमतिस्तथा ।
द्वावेतौ सुखमेधेते यद्भविष्यो विनश्यति ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 7 )

Meaning in English

He who is prepared for the future and he who deals cleverly with any
situation that may arise are both happy; but the fatalistic man who
wholly depends on luck is ruined.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो भविष्य के लिए तैयार है और जो किसी भी परिस्थिति को चतुराई से निपटता है. ये दोनों व्यक्ति सुखी है. लेकिन जो आदमी सिर्फ नसीब के सहारे चलता है वह बर्बाद होता है.


राज्ञि धर्मिणि धर्मिष्ठाः पापे पापाः समे समाः ।
राजानमनुवर्तन्ते यथा राजा तथा प्रजाः ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 8 )

Meaning in English

If the king is virtuous, then the subjects are also virtuous. If the king is
sinful, then the subjects also become sinful. If he is mediocre, then the
subjects are mediocre. The subjects follow the example of the king. In
short, as is the king so are the subjects.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि राजा पुण्यात्मा है तो प्रजा भी वैसी ही होती है. यदि राजा पापी है तो प्रजा भी पापी. यदि वह सामान्य है तो प्रजा सामान्य. प्रजा के सामने राजा का उद्हारण होता है. और वो उसका अनुसरण करती है.


जीवन्तं मृतवन्मन्ये देहिनं धर्मवर्जितम् ।
मृतो धर्मेण संयुक्तो दीर्घजीवी न संशयः ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 9 )

Meaning in English

I consider him who does not act religiously as dead though living, but
he who dies acting religiously unquestionably lives long though he is
dead.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

मेरी नजरो में वह आदमी मृत है जो जीते जी धर्म का पालन नहीं करता. लेकिन जो धर्म पालन में अपने प्राण दे देता है वह मरने के बाद भी बेशक लम्बा जीता है.


धर्मार्थकाममोक्षाणां यस्यैकोऽपि न विद्यते ।
अजागलस्तनस्येव तस्य जन्म निरर्थकम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 10)

Meaning in English

He who has acquired neither virtue, wealth, satisfaction of desires nor
salvation (dharma, artha, kama, moksa), lives an utterly useless life,
like the “nipples” hanging from the neck of a goat.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिस व्यक्ति ने न ही कोई ज्ञान संपादन किया, ना ही पैसा कमाया, मुक्ति के लिए जो आवश्यक है उसकी पूर्ति भी नहीं किया. वह एक निहायत बेकार जिंदगी जीता है जैसे के बकरी की गर्दन से झूलने वाले स्तन.

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Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 11)

Meaning in English

The hearts of base men burn before the fire of other’s fame, and they
slander them being themselves unable to rise to such a high position.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो नीच लोग होते है वो दुसरे की कीर्ति को देखकर जलते है. वो दुसरे के बारे में अपशब्द कहते है क्यों की उनकी कुछ करने की औकात नहीं है.


बन्धाय विषयासङ्गो मुक्त्यै निर्विषयं मनः ।
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 12)

Meaning in English

Excessive attachment to sense pleasures leads to bondage, and
detachment from sense pleasures leads to liberation; therefore it is the
mind alone that is responsible for bondage or liberation.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि विषय बहुत प्रिय है तो वो बंधन में डालते है. विषय सुख की अनासक्ति से मुक्ति की और गति होती है. इसीलिए मुक्ति या बंधन का मूल मन ही है.


देहाभिमाने गलितं ज्ञानेन परमात्मनि ।
यत्र यत्र मनो याति तत्र तत्र समाधयः ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 13)

Meaning in English

He who sheds bodily identification by means of knowledge of the
indwelling Supreme Self (Paramatma), will always be absorbed in
meditative trance (samadhi) wherever his mind leads him.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो आत्म स्वरुप का बोध होने से खुद को शारीर नहीं मानता, वह हरदम समाधी में ही रहता है भले ही उसका शरीर कही भी चला जाए.


ईप्सितं मनसः सर्वं कस्य सम्पद्यते सुखम् ।
दैवायत्तं यतः सर्वं तस्मात्सन्तोषमाश्रयेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 14)

Meaning in English

Who realises all the happiness he desires? Everything is in the hands of
God. Therefore one should learn contentment.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

किस को सब सुख प्राप्त हुए जिसकी कामना की. सब कुछ भगवान् के हाथ में है. इसलिए हमें संतोष में जीना होगा.


यथा धेनुसहस्रेषु वत्सो गच्छति मातरम् ।
तथा यच्च कृतं कर्म कर्तारमनुगच्छति ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 15)

Meaning in English

As a calf follows its mother among a thousand cows, so the (good or
bad) deeds of a man follow him.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिस प्रकार एक गाय का बछड़ा, हजारो गायो में अपनी माँ के पीछे चलता है उसी तरह कर्म आदमी के पीछे चलते है.

अनवस्थितकार्यस्य न जने न वने सुखम् ।
जनो दहति संसर्गाद्वनं संगविवर्जनात् ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 16)

Meaning in English

He whose actions are disorganised has no happiness either in the midst
of men or in a jungle — in the midst of men his heart burns by social
contacts, and his helplessness burns him in the forest.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिस के काम करने में कोई व्यवस्था नहीं, उसे कोई सुख नहीं मिल सकता. लोगो के बीच या वन में. लोगो के मिलने से उसका ह्रदय जलता है और वन में तो कोई सुविधा होती ही नहीं.


खनित्वा हि खनित्रेण भूतले वारि विन्दति ।
तथा गुरुगतां विद्यां शुश्रूषुरधिगच्छति ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 17 )

Meaning in English

As the man who digs obtains underground water by use of a shovel, so
the student attains the knowledge possessed by his preceptor through
his service.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि आदमी उपकरण का सहारा ले तो गर्भजल से पानी निकाल सकता है. उसी तरह यदि विद्यार्थी अपने गुरु की सेवा करे तो गुरु के पास जो ज्ञान निधि है उसे प्राप्त करता है.


कर्मायत्तं फलं पुंसां बुद्धिः कर्मानुसारिणी ।
तथापि सुधियश्चार्या सुविचार्यैव कुर्वते ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 18)

Meaning in English

Men reap the fruits of their deeds, and intellects bear the mark of deeds
performed in previous lives; even so the wise act after due
circumspection.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हमें अपने कर्म का फल मिलता है. हमारी बुद्धि पर इसके पहले हमने जो कर्म किये है उसका निशान है. इसीलिए जो बुद्धिमान लोग है वो सोच विचार कर कर्म करते है.


सन्तोषस्त्रिषु कर्तव्यः स्वदारे भोजने धने ।
त्रिषु चैव न कर्तव्योऽध्ययने जपदानयोः ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 19)

Meaning in English

Even the man who has taught the spiritual significance of just one letter
ought to be worshiped. He who does not give reverence to such a guru
is born as a dog a hundred times, and at last takes birth as a chandala
(dog-eater).

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिस व्यक्ति ने आपको अध्यात्मिक महत्ता का एक अक्षर भी पढाया उसकी पूजा करनी चाहिए. जो ऐसे गुरु का सम्मान नहीं करता वह सौ बार कुत्ते का जन्म लेता है. और आखिर चंडाल बनता है. चांडाल वह है जो कुत्ता खाता है.


एकाक्षरप्रदातारं यो गुरुं नाभिवन्दते ।
श्वानयोनिशतं गत्वा चाण्डालेष्वभिजायते ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 20 )

Meaning in English

At the end of the yuga, Mount Meru may be shaken; at the end of the
kalpa, the waters of the seven oceans may be disturbed; but a sadhu
will never swerve from the spiritual path

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जब युग का अंत हो जायेगा तो मेरु पर्वत डिग जाएगा. जब कल्प का अंत होगा तो सातों समुद्र का पानी विचलित हो जायगा. लेकिन साधू कभी भी अपने अध्यात्मिक मार्ग से नहीं डिगेगा.


युगान्ते प्रचलेन्मेरुः कल्पान्ते सप्त सागराः ।
साधवः प्रतिपन्नार्थान्न चलन्ति कदाचन ॥

Chanakya Niti (Chap. 13 – Shloka 21

Meaning in English

There are three gems upon this earth; food, water, and pleasing words —
fools (mudhas) consider pieces of rocks as gems.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

इस धरती पर अन्न, जल और मीठे वचन ये असली रत्न है. मूर्खो को लगता है पत्थर के टुकड़े रत्न है.

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