(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 14 (20 Slokas)

(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 14 (20 Slokas)

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Chanakya Niti Shlokas (चाणक्य नीति श्लोक)

पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् ।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 1)

Meaning in English

Poverty, disease, sorrow, imprisonment and other evils are the fruits
borne by the tree of one’s own sins.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

गरीबी, दुःख और एक बंदी का जीवन यह सब व्यक्ति के किए हुए पापो का ही फल है.


आत्मापराधवृक्षस्य फलान्येतानि देहिनाम् ।
दारिद्र्यदुःखरोगाणि बन्धनव्यसनानि च ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 2)

Meaning in English

Wealth, a friend, a wife, and a kingdom may be regained; but this body
when lost may never be acquired again.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

आप दौलत, मित्र, पत्नी और राज्य गवाकर वापस पा सकते है लेकिन यदि आप अपनी काया गवा देते है तो वापस नहीं मिलेगी.


पुनर्वित्तं पुनर्मित्रं पुनर्भार्या पुनर्मही ।
एतत्सर्वं पुनर्लभ्यं न शरीरं पुनः पुनः ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 3)

Meaning in English

The enemy can be overcome by the union of large numbers, just as
grass through its collectiveness wards off erosion caused by heavy
rainfall.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि हम बड़ी संख्या में एकत्र हो जाए तो दुश्मन को हरा सकते है. उसी प्रकार जैसे घास के तिनके एक दुसरे के साथ रहने के कारण भारी बारिश में भी क्षय नहीं होते.


बहूनां चैव सत्त्वानां समवायो रिपुञ्जयः ।
वर्षाधाराधरो मेघस्तृणैरपि निवार्यते ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 4)

Meaning in English

Oil on water, a secret communicated to a base man, a gift given to a
worthy receiver, and scriptural instruction given to an intelligent man
spread out by virtue of their nature.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

पानी पर तेल, एक कमीने आदमी को बताया हुआ राज, एक लायक व्यक्ति को दिया हुआ दान और एक बुद्धिमान व्यक्ति को पढाया हुआ शास्त्रों का ज्ञान अपने स्वभाव के कारण तेजी से फैलते है


जले तैलं खले गुह्यं पात्रे दानं मनागपि ।
प्राज्ञे शास्त्रं स्वयं याति विस्तारं वस्तुशक्तितः ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 5)

Meaning in English

If men should always retain the state of mind they experience when
hearing religious instruction, when present at a crematorium ground,
and when in sickness — then who could not attain liberation.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह व्यक्ति क्यों मुक्ति को नहीं पायेगा जो निम्न लिखित परिस्थितियों में जो उसके मन की अवस्था होती है उसे कायम रखता है… जब वह धर्म के अनुदेश को सुनता है. जब वह स्मशान घाट में होता है. जब वह बीमार होता है.


धर्माख्याने श्मशाने च रोगिणां या मतिर्भवेत् ।
सा सर्वदैव तिष्ठेच्चेत्को न मुच्येत बन्धनात् ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 6)

Meaning in English

If a man should feel before, as he feels after, repentance — then who
would not attain perfection?

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह व्यक्ति क्यों पूर्णता नहीं हासिल करेगा जो पश्चाताप में जो मन की अवस्था होती है, उसी अवस्था को काम करते वक़्त बनाए रखेंगा.


उत्पन्नपश्चात्तापस्य बुद्धिर्भवति यादृशी ।
तादृशी यदि पूर्वं स्यात्कस्य न स्यान्महोदयः ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 7)

Meaning in English

We should not feel pride in our charity, austerity, valour, scriptural
knowledge, modesty and morality for the world is full of the rarest
gems

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हमें अभिमान नहीं होना चाहिए जब हम ये बाते करते है.. १. परोपकार २. आत्म संयम ३. पराक्रम ४. शास्त्र का ज्ञान हासिल करना. ५. विनम्रता ६. नीतिमत्ता यह करते वक़्त अभिमान करने की इसलिए जरुरत नहीं क्यों की दुनिया बहुत कम दिखाई देने वाले दुर्लभ रत्नों से भरी पड़ी है.


दाने तपसि शौर्ये वा विज्ञाने विनये नये ।
विस्मयो नहि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 8)

Meaning in English

He who lives in our mind is near though he may actually be far away;
but he who is not in our heart is far though he may really be nearby.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह जो हमारे मन में रहता हमारे निकट है. हो सकता है की वास्तव में वह हमसे बहुत दूर हो. लेकिन वह व्यक्ति जो हमारे निकट है लेकिन हमारे मन में नहीं है वह हमसे बहोत दूर है.


दूरस्थोऽपि न दूरस्थो यो यस्य मनसि स्थितः ।
यो यस्य हृदये नास्ति समीपस्थोऽपि दूरतः ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 9 )

Meaning in English

We should always speak what would please the man of whom we
expect a favour, like the hunter who sings sweetly when he desires to
shoot a deer.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि हम किसीसे कुछ पाना चाहते है तो उससे ऐसे शब्द बोले जिससे वह प्रसन्न हो जाए. उसी प्रकार जैसे एक शिकारी मधुर गीत गाता है जब वह हिरन पर बाण चलाना चाहता है.


यस्माच्च प्रियमिच्छेत्तु तस्य ब्रूयात्सदा प्रियम् ।
व्याधो मृगवधं कर्तुं गीतं गायति सुस्वरम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 10)

Meaning in English

It is ruinous to be familiar with the king, fire, the religious preceptor,
and a woman. To be altogether indifferent of them is to be deprived of
the opportunity to benefit ourselves, hence our association with them
must be from a safe distance.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो व्यक्ति राजा से, अग्नि से, धर्म गुरु से और स्त्री से बहुत परिचय बढ़ाता है वह विनाश को प्राप्त होता है. जो व्यक्ति इनसे पूर्ण रूप से अलिप्त रहता है, उसे अपना भला करने का कोई अवसर नहीं मिलता. इसलिए इनसे सुरक्षित अंतर रखकर सम्बन्ध रखना चाहिए.


अत्यासन्ना विनाशाय दूरस्था न फलप्रदा ।
सेव्यतां मध्यभावेन राजा वह्निर्गुरुः स्त्रियः ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 11)

Meaning in English

We should always deal cautiously with fire, water, women, foolish
people, serpents, and members of a royal family; for they may, when
the occasion presents itself, at once bring about our death

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हम इनके साथ बहुत सावधानी से पेश आये.. १. अग्नि २. पानी ३. औरत ४. मुर्ख ५. साप ६. राज परिवार के सदस्य. जब जब हम इनके संपर्क में आते है. क्योकि ये हमें एक झटके में मौत तक पंहुचा सकते है.


अग्निरापः स्त्रियो मूर्खाः सर्पा राजकुलानि च ।
नित्यं यत्नेन सेव्यानि सद्यः प्राणहराणि षट् ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 12)

Meaning in English

He should be considered to be living who is virtuous and pious, but the
life of a man who is destitute of religion and virtues is void of any
blessing.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वही व्यक्ति जीवित है जो गुणवान है और पुण्यवान है. लेकिन जिसके पास धर्म और गुण नहीं उसे क्या शुभ कामना दी जा सकती है.


स जीवति गुणा यस्य यस्य धर्मः स जीवति ।
गुणधर्मविहीनस्य जीवितं निष्प्रयोजनम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 13)

Meaning in English

If you wish to gain control of the world by the performance of a single
deed, then keep the following fifteen, which are prone to wander here
and there, from getting the upper hand of you: the five sense objects
(objects of sight, sound, smell, taste, and touch); the five sense organs
(ears, eyes, nose, tongue and skin) and organs of activity (hands, legs,
mouth, genitals and anus).

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि आप दुनिया को एक काम करके जितना चाहते हो तो इन पंधरा को अपने काबू में रखो. इन्हें इधर उधर ना भागने दे. पांच इन्द्रियों के विषय १. जो दिखाई देता है २. जो सुनाई देता है ३. जिसकी गंध आती है ४. जिसका स्वाद आता है. ५. जिसका स्पर्श होता है. पांच इन्द्रिय १. आँख २. कान ३. नाक ४. जिव्हा ५. त्वचा पांच कर्मेन्द्रिय १. हाथ २. पाँव ३. मुह ४. जननेंद्रिय ५. गुदा


यदीच्छसि वशीकर्तुं जगदेकेन कर्मणा ।
पुरा पञ्चदशास्येभ्यो गां चरन्ती निवारय ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 14)

Meaning in English

He is a pandit (man of knowledge) who speaks what is suitable to the
occasion, who renders loving service according to his ability, and who
knows the limits of his anger.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वही पंडित है जो वही बात बोलता है जो प्रसंग के अनुरूप हो. जो अपनी शक्ति के अनुरूप दुसरो की प्रेम से सेवा करता है. जिसे अपने क्रोध की मर्यादा का पता है.


प्रस्तावसदृशं वाक्यं प्रभावसदृशं प्रियम् ।
आत्मशक्तिसमं कोपं यो जानाति स पण्डितः ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 15)

Meaning in English

One single object (a woman) appears in three different ways: to the man
who practices austerity it appears as a corpse, to the sensual it appears
as a woman, and to the dogs as a lump of flesh.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

एक ही वस्तु देखने वालो की योग्यता के अनुरूप बिलग बिलग दिखती है. तप करने वाले में वस्तु को देखकर कोई कामना नहीं जागती. लम्पट आदमी को हर वास्तु में स्त्री दिखती है. कुत्ते को हर वस्तु में मांस दिखता है.

एक एव पदार्थस्तु त्रिधा भवति वीक्षितः ।

कुणपं कामिनी मांसं योगिभिः कामिभिः श्वभिः ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 16)

Meaning in English

A wise man should not divulge the formula of a medicine which he has
well prepared; an act of charity which he has performed; domestic
conflicts; private affairs with his wife; poorly prepared food he may
have been offered; or slang he may have heard.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो व्यक्ति बुद्धिमान है वह निम्न लिखित बाते किसी को ना बताये… वह औषधि उसने कैसे बनायीं जो अच्छा काम कर रही है. वह परोपकार जो उसने किया. उसके घर के झगडे. उसकी उसके पत्नी के साथ होने वाली व्यक्तिगत बाते. उसने जो ठीक से न पका हुआ खाना खाया. जो गालिया उसने सुनी.


सुसिद्धमौषधं धर्मं गृहच्छिद्रं च मैथुनम् ।
कुभुक्तं कुश्रुतं चैव मतिमान्न प्रकाशयेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 17)

Meaning in English

The cuckoos remain silent for a long time (for several seasons) until
they are able to sing sweetly (in the Spring ) so as to give joy to all.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

कोकिल तब तक मौन रहते है. जबतक वो मीठा गाने की क़ाबलियत हासिल नहीं कर लेते और सबको आनंद नहीं पंहुचा सकते.


तावन्मौनेन नीयन्ते कोकिलैश्चैव वासराः ।
यावत्सर्वजनानन्ददायिनी वाक्प्रवर्तते ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 18)

Meaning in English

We should secure and keep the following: the blessings of meritorious
deeds, wealth, grain, the words of the spiritual master, and rare
medicines. Otherwise life becomes impossible.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हम निम्न लिखित बाते प्राप्त करे और उसे कायम रखे. हमें पुण्य कर्म के जो आशीर्वाद मिले. धन, अनाज, वो शब्द जो हमने हमारे अध्यात्मिक गुरु से सुने. कम पायी जाने वाली दवाइया. हम ऐसा नहीं करते है तो जीना मुश्किल हो जाएगा.


धर्मं धनं च धान्यं च गुरोर्वचनमौषधम् ।
सुगृहीतं च कर्तव्यमन्यथा तु न जीवति ॥

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 19)

Meaning in English

Eschew (Avoid) wicked company and associate with saintly persons.
Acquire virtue day and night, and always meditate on that which is
eternal forgetting that which is temporary.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

कुसंग का त्याग करे और संत जानो से मेलजोल बढाए. दिन और रात गुणों का संपादन करे. उसपर हमेशा चिंतन करे जो शाश्वत है और जो अनित्य है उसे भूल जाए.


त्यज दुर्जनसंसर्गं भज साधुसमागमम् ।
कुरु पुण्यमहोरात्रं स्मर नित्यमनित्यतः ॥

Meaning in English

Chanakya Niti (Chap. 14 – Shloka 20)

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