(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 17 (21 Slokas)

(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 17 (21 Slokas)

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पुस्तकप्रत्ययाधीतं नाधीतं गुरुसन्निधौ ।
सभामध्ये न शोभन्ते जारगर्भा इव स्त्रियः ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 1)

Meaning in English

The scholar who has acquired knowledge by studying innumerable
books without the blessings of a bonafide spiritual master does not
shine in an assembly of truly learned men just as an illegitimate child is
not honoured in society.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह विद्वान जिसने असंख्य किताबो का अध्ययन बिना सदगुरु के आशीर्वाद से कर लिया वह विद्वानों की सभा में एक सच्चे विद्वान के रूप में नहीं चमकता है. उसी प्रकार जिस प्रकार एक नाजायज औलाद को दुनिया में कोई प्रतिष्ठा हासिल नहीं होती.


कृते प्रतिकृतिं कुर्याद्धिंसने प्रतिहिंसनम् ।
तत्र दोषो न पतति दुष्टे दुष्टं समाचरेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 2)

Meaning in English

We should repay the favours of others by acts of kindness; so also
should we return evil for evil in which there is no sin, for it is necessary
to pay a wicked man in his own coin

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हमें दुसरो से जो मदद प्राप्त हुई है उसे हमें लौटना चाहिए. उसी प्रकार यदि किसीने हमसे यदि दुष्टता की है तो हमें भी उससे दुष्टता करनी चाहिए. ऐसा करने में कोई पाप नहीं है.


यद्दूरं यद्दुराराध्यं यच्च दूरे व्यवस्थितम् ।
तत्सर्वं तपसा साध्यं तपो हि दुरतिक्रमम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 3)

Meaning in English

That thing which is distant, that thing which appears impossible, and
that which is far beyond our reach, can be easily attained through
tapasya (religious austerity), for nothing can surpass austerity

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह चीज जो दूर दिखाई देती है, जो असंभव दिखाई देती है, जो हमारी पहुच से बहार दिखाई देती है, वह भी आसानी से हासिल हो सकती है यदि हम तप करते है. क्यों की तप से ऊपर कुछ नहीं.


लोभश्चेदगुणेन किं पिशुनता यद्यस्ति किं पातकैः
सत्यं चेत्तपसा च किं शुचि मनो यद्यस्ति तीर्थेन किम् ।
सौजन्यं यदि किं गुणैः सुमहिमा यद्यस्ति किं मण्डनैः
सद्विद्या यदि किं धनैरपयशो यद्यस्ति किं मृत्युना ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 4 )

Meaning in English

What vice could be worse than covetousness? What is more sinful than
slander? For one who is truthful, what need is there for austerity? For
one who has a clean heart, what is the need for pilgrimage? If one has a
good disposition, what other virtue is needed? If a man has fame, what
is the value of other ornamentation? What need is there for wealth for
the man of practical knowledge? And if a man is dishonoured, what
could there be worse in death?

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

लोभ से बड़ा दुर्गुण क्या हो सकता है. पर निंदा से बड़ा पाप क्या है. जो सत्य में प्रस्थापित है उसे तप करने की क्या जरूरत है. जिसका ह्रदय शुद्ध है उसे तीर्थ यात्रा की क्या जरूरत है. यदि स्वभाव अच्छा है तो और किस गुण की जरूरत है. यदि कीर्ति है तो अलंकार की क्या जरुरत है. यदि व्यवहार ज्ञान है तो दौलत की क्या जरुरत है. और यदि अपमान हुआ है तो मृत्यु से भयंकर नहीं है क्या.


पिता रत्नाकरो यस्य लक्ष्मीर्यस्य सहोदरा ।
शङ्खो भिक्षाटनं कुर्यान्न दत्तमुपतिष्ठते ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 5 )

Meaning in English

Though the sea, which is the reservoir of all jewels, is the father of the
conch shell, and the Goddess of fortune Lakshmi is conch’s sister, still
the conch must go from door to door for alms (in the hands of a
beggar). It is true, therefore, that one gains nothing without having
given in the past.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

समुद्र ही सभी रत्नों का भण्डार है. वह शंख का पिता है. देवी लक्ष्मी शंख की बहन है. लेकिन दर दर पर भीख मांगने वाले हाथ में शंख ले कर घूमते है. इससे यह बात सिद्ध होती है की उसी को मिलेगा जिसने पहले दिया है.


अशक्तस्तु भवेत्साधुर्ब्रह्मचारी वा निर्धनः ।
व्याधितो देवभक्तश्च वृद्धा नारी पतिव्रता ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 6)

Meaning in English

When a man has no strength left in him he becomes a sadhu, one
without wealth acts like a brahmacari, a sick man behaves like a
devotee of the Lord, and when a woman grows old she becomes
devoted to her husband.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जब आदमी में शक्ति नहीं रह जाती वह साधू हो जाता है. जिसके पास दौलत नहीं होती वह ब्रह्मचारी बन जाता है. रुग्ण भगवान् का भक्त हो जाता है. जब औरत बूढी होती है तो पति के प्रति समर्पित हो जाती है.


नान्नोदकसमं दानं न तिथिर्द्वादशी समा ।
न गायत्र्याः परो मन्त्रो न मातुर्दैवतं परम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 7 )


तक्षकस्य विषं दन्ते मक्षिकायास्तु मस्तके ।
वृश्चिकस्य विषं पुच्छे सर्वाङ्गे दुर्जने विषम् ॥

Chanakya Niti (Chap.17 – Shloka 8)

Meaning in English

There is poison in the fang of the serpent, in the mouth of the fly and in
the sting of a scorpion; but the wicked man is saturated with it.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

साप के दंश में विष होता है. कीड़े के मुह में विष होता है. बिच्छू के डंख में विष होता है. लेकिन दुष्ट व्यक्ति तो पूर्ण रूप से विष से भरा होता है.


पत्युराज्ञां विना नारी ह्युपोष्य व्रतचारिणी ।
आयुष्यं हरते भर्तुः सा नारी नरकं व्रजेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 9)

Meaning in English

The woman who fasts and observes religious vows without the
permission of her husband shortens his life, and goes to hell.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो स्त्री अपने पति की सम्मति के बिना व्रत रखती है और उपवास करती है, वह उसकी आयु घटाती है और खुद नरक में जाती है.


न दानैः शुध्यते नारी नोपवासशतैरपि ।
न तीर्थसेवया तद्वद्भर्तुः पदोदकैर्यथा ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 10 )

Meaning in English

A woman does not become holy by offering by charity, by observing
hundreds of fasts, or by sipping sacred water, as by sipping the water
used to wash her husbands feet.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

स्त्री दान दे कर, उपवास रख कर और पवित्र जल का पान करके पावन नहीं हो सकती. वह पति के चरणों को धोने से और ऐसे जल का पान करने से शुद्ध होती है.


पादशेषं पीतशेषं सन्ध्याशेषं तथैव च ।
श्वानमूत्रसमं तोयं पीत्वा चान्द्रायणं चरेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 11)


दानेन पाणिर्न तु कङ्कणेन
स्नानेन शुद्धिर्न तु चन्दनेन ।
मानेन तृप्तिर्न तु भोजनेन
ज्ञानेन मुक्तिर्न तु मुण्डनेन ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 12)

Meaning in English

The hand is not so well adorned by ornaments as by charitable
offerings; one does not become clean by smearing sandalwood paste
upon the body as by taking a bath; one does not become so much
satisfied by dinner as by having respect shown to him; and salvation is
not attained by self-adornment as by cultivation of spiritual knowledge.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

एक हाथ की शोभा गहनों से नहीं दान देने से है. चन्दन का लेप लगाने से नहीं जल से नहाने से निर्मलता आती है. एक व्यक्ति भोजन खिलाने से नहीं सम्मान देने से संतुष्ट होता है. मुक्ति खुद को सजाने से नहीं होती, अध्यात्मिक ज्ञान को जगाने से होती है.


नापितस्य गृहे क्षौरं पाषाणे गन्धलेपनम् ।
आत्मरूपं जले पश्यन् शक्रस्यापि श्रियं हरेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 13 )


सद्यः प्रज्ञाहरा तुण्डी सद्यः प्रज्ञाकरी वचा ।
सद्यः शक्तिहरा नारी सद्यः शक्तिकरं पयः ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 14)

Meaning in English

The eating of tundi fruit deprives a man of his sense, while the vacha
root administered revives his reasoning immediately. A woman at once
robs a man of his vigour while milk at once restores it.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

टुंडी फल खाने से आदमी की समझ खो जाती है. वच मूल खिलाने से लौट आती है. औरत के कारण आदमी की शक्ति खो जाती है, दूध से वापस आती है.


परोपकरणं येषां जागर्ति हृदये सताम् ।
नश्यन्ति विपदस्तेषां सम्पदः स्युः पदे पदे ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 15)

Meaning in English

He who nurtures benevolence for all creatures within his heart
overcomes all difficulties and will be the recipient of all types of riches
at every step.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जिसमे सभी जीवो के प्रति परोपकार की भावना है वह सभी संकटों पर मात करता है और उसे हर कदम पर सभी प्रकार की सम्पन्नता प्राप्त होती है.


यदि रामा यदि च रमा यदि तनयो विनयगुणोपेतः ।
तनये तनयोत्पत्तिः सुरवरनगरे किमाधिक्यम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 16)

Meaning in English

What is there to be enjoyed in the world of Lord Indra for one whose
wife is loving and virtuous, who possesses wealth, who has a wellbehaved son endowed with good qualities, and who has a grandchildren
born of his children?

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वह इंद्र के राज्य में जाकर क्या सुख भोगेगा…. जिसकी पत्नी प्रेमभाव रखने वाली और सदाचारी है. जिसके पास में संपत्ति है. जिसका पुत्र सदाचारी और अच्छे गुण वाला है. जिसको अपने पुत्र द्वारा पौत्र हुए है.


आहारनिद्राभयमैथुनानि
समानि चैतानि नृणां पशूनाम् ।
ज्ञानं नराणामधिको विशेषो
ज्ञानेन हीनाः पशुभिः समानाः ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 17 )

Meaning in English

Men have eating, sleeping, fearing and mating in common with the
lower animals. That in which men excel the beasts is discretionary
knowledge; hence, indiscreet men who are without knowledge should
be regarded as beasts.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

मनुष्यों में और निम्न स्तर के प्राणियों में खाना, सोना, घबराना और गमन करना समान है. मनुष्य अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ है तो विवेक ज्ञान की बदौलत. इसलिए जिन मनुष्यों में ज्ञान नहीं है वे पशु है.


दानार्थिनो मधुकरा यदि कर्णतालैर्दूरीकृताः
दूरीकृताः करिवरेण मदान्धबुद्ध्या ।
तस्यैव गण्डयुग्ममण्डनहानिरेषा
भृंगाः पुनर्विकचपद्मवने वसन्ति ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 18)

Meaning in English

If the bees which seek the liquid oozing from the head of a lustintoxicated elephant are driven away by the flapping of his ears, then
the elephant has lost only the ornament of his head. The bees are quite
happy in the lotus filled lake.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

यदि मद मस्त हाथी अपने माथे से टपकने वाले रस को पीने वाले भौरों को कान हिलाकर उड़ा देता है, तो भौरों का कुछ नहीं जाता, वे कमल से भरे हुए तालाब की ओर ख़ुशी से चले जाते है. हाथी के माथे का शृंगार कम हो जाता है.


राजा वेश्या यमश्चाग्निस्तस्करो बालयाचकौ ।
परदुःखं न जानन्ति अष्टमो ग्रामकण्टकः ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 19)

Meaning in English

A king, a prostitute, Lord Yamaraja, fire, a thief, a young boy, and a
beggar cannot understand the suffering of others. The eighth of this
category is the tax collector.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

ये आठो कभी दुसरो का दुःख नहीं समझ सकते … १. राजा २. वेश्या ३. यमराज ४. अग्नि ५. चोर ६. छोटा बच्चा ७. भिखारी और ८. कर वसूल करने वाला.


अधः पश्यसि किं बाले पतितं तव किं भुवि ।
रे रे मूर्ख न जानासि गतं तारुण्यमौक्तिकम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 20)

Meaning in English

O lady, why are you gazing downward? Has something of yours fallen
on the ground? (She replies) O fool, can you not understand the pearl of
my youth has slipped away?

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हे महिला, तुम निचे झुककर क्या देख रही हो? क्या तुम्हारा कुछ जमीन पर गिर गया है? हे मुर्ख, मेरे तारुण्य का मोती न जाने कहा फिसल गया


व्यालाश्रयापि विकलापि सकण्टकापि
वक्रापि पङ्किलभवापि दुरासदापि ।
गन्धेन बन्धुरसि केतकि सर्वजन्ता
रेको गुणः खलु निहन्ति समस्तदोषान् ॥

Chanakya Niti (Chap. 17 – Shloka 21)

Meaning in English

O ketki flower! Serpents live in your midst, you bear no edible fruits,
your leaves are covered with thorns, you are crooked in growth, you
thrive in mud, and you are not easily accessible. Still for your
exceptional fragrance you are as dear as a kinsmen to others. Hence, a
single excellence overcomes a multitude of blemishes.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हे केतकी पुष्प! तुममे तो कीड़े रहते है. तुमसे ऐसा कोई फल भी नहीं बनता जो खाया जाय. तुम्हारे पत्ते काटो से ढके है. तुम टेढ़े होकर बढ़ते हो. कीचड़ में खिलते हो. कोई तुम्हे आसानी से पा नहीं सकता. लेकिन तुम्हारी अतुलनीय खुशबु के कारण दुसरे पुष्पों की तरह सभी को प्रिय हो. इसीलिए एक ही अच्छाई अनेक बुराइयों पर भारी पड़ती है.

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