(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 2 (20 Slokas)

(चाणक्य नीति श्लोक) Chanakya Niti Shlokas – Chapter 2 (20 Slokas)

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Chanakya Niti Shlokas (चाणक्य नीति श्लोक)

अनृतं साहसं माया मूर्खत्वमतिलोभिता ।
अशौचत्वं निर्दयत्वं स्त्रीणां दोषाः स्वभावजाः

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 1)

Meaning in English

Untruthfulness, rashness, guile, stupidity, avarice, uncleanliness and
cruelty are a women’s seven natural flaws.

Meaning in Hindi (भावार्थ )

झूठ बोलना, कठोरता, छल करना, बेवकूफी करना, लालच, अपवित्रता और निर्दयता ये औरतो के कुछ नैसर्गिक दुर्गुण है।

भोज्यं भोजनशक्तिश्च रतिशक्तिर्वराङ्गना ।
विभवो दानशक्तिश्च नाल्पस्य तपसः फलम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 2)

Meaning in English

To have ability for eating when dishes are ready at hand, to be robust
and virile in the company of one’s religiously wedded wife, and to have
a mind for making charity when one is prosperous are the fruits of no
ordinary austerities.

Meaning in Hindi (भावार्थ )

भोजन के योग्य पदार्थ और भोजन करने की क्षमता, सुन्दर स्त्री और उसे भोगने के लिए काम शक्ति, पर्याप्त धनराशी तथा दान देने की भावना – ऐसे संयोगों का होना सामान्य तप का फल नहीं है।

यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दानुगामिनी ।
विभवे यश्च सन्तुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 3)

Meaning in English

He whose son is obedient to him, whose wife’s conduct is in accordance
with his wishes, and who is content with his riches, has his heaven here
on earth.

Meaning in Hindi (भावार्थ )

उस व्यक्ति ने धरती पर ही स्वर्ग को पा लिया : १. जिसका पुत्र आज्ञांकारी है, २. जिसकी पत्नी उसकी इच्छा के अनुरूप व्यव्हार करती है, ३. जिसे अपने धन पर संतोष है।

ते पुत्रा ये पितुर्भक्ताः स पिता यस्तु पोषकः ।
तन्मित्रं यत्र विश्वासः सा भार्या यत्र निर्वृतिः

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 4)

Meaning in English

They alone are sons who are devoted to their father. He is a father who
supports his sons. He is a friend in whom we can confide, and she only
is a wife in whose company the husband feels contented and peaceful

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

पुत्र वही है जो पिता का कहना मानता हो, पिता वही है जो पुत्रों का पालन-पोषण करे, मित्र वही है जिस पर आप विश्वास कर सकते हों और पत्नी वही है जिससे सुख प्राप्त हो।

परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम् ।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 5)

Meaning in English

Avoid him who talks sweetly before you but tries to ruin you behind
your back, for he is like a pitcher of poison with milk on top.

Meaning in Hindi (भावार्थ )

ऐसे लोगों से बचे जो आपके मुह पर तो मीठी बातें करते हैं, लेकिन आपके पीठ पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बनाते है, ऐसा करने वाले तो उस विष के घड़े के समान है जिसकी उपरी सतह दूध से भरी है।

न विश्वसेत्कुमित्रे च मित्रे चापि न विश्वसेत् ।
कदाचित्कुपितं मित्रं सर्वं गुह्यं प्रकाशयेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 6)

Meaning in English

Do not put your trust in a bad companion nor even trust an ordinary
friend, for if he should get angry with you, he may bring all your secrets
to light.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

एक बुरे मित्र पर तो कभी विश्वास ना करे। एक अच्छे मित्र पर भी विश्वास ना करें। क्यूंकि यदि ऐसे लोग आपसे रुष्ट होते है तो आप के सभी राज से पर्दा खोल देंगे।

मनसा चिन्तितं कार्यं वाचा नैव प्रकाशयेत् ।
मन्त्रेण रक्षयेद्गूढं कार्ये चापि नियोजयेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 7)

Meaning in English

Do not reveal what you have thought upon doing, but by wise council
keep it secret being determined to carry it into execution.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

मन में सोंचे हुए कार्य को किसी के सामने प्रकट न करें बल्कि मनन पूर्वक उसकी सुरक्षा करते हुए उसे कार्य में परिणत कर दें।

कष्टं च खलु मूर्खत्वं कष्टं च खलु यौवनम् ।
कष्टात्कष्टतरं चैव परगेहनिवासनम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 8)

Meaning in English

Foolishness is indeed painful, and verily so is youth, but more painful
by far than either is being obliged in another person’s house.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

मुर्खता दुखदायी है, जवानी भी दुखदायी है,लेकिन इन सबसे कहीं ज्यादा दुखदायी किसी दुसरे के घर जाकर उसका अहसान लेना है।

शैले शैले च माणिक्यं मौक्तिकं न गजे गजे ।
साधवो न हि सर्वत्र चन्दनं न वने वने ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 9

Meaning in English

There does not exist a ruby in every mountain, nor a pearl in the head of
every elephant; neither are the sadhus to be found everywhere, nor
sandal trees in every forest.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

हर पर्वत पर माणिक्य नहीं होते, हर हाथी के सर पर मणी नहीं होता, सज्जन पुरुष भी हर जगह नहीं होते और हर वन मे चन्दन के वृक्ष भी नहीं होते हैं।

पुत्राश्च विविधैः शीलैर्नियोज्याः सततं बुधैः ।
नीतिज्ञाः शीलसम्पन्ना भवन्ति कुलपूजिताः ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 10)

Meaning in English

Wise men should always bring up their sons in various moral ways, for
children who have knowledge of niti-sastra and are well-behaved
become a glory to their family.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

बुद्धिमान पिता को अपने पुत्रों को शुभ गुणों की सीख देनी चाहिए क्योंकि नीतिज्ञ और ज्ञानी व्यक्तियों की ही कुल में पूजा होती है।

माता शत्रुः पिता वैरी याभ्यां बाला न पाठिताः ।
सभामध्ये न शोभन्ते हंसमध्ये बको यथा ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 11)

Meaning in English

Those parents who do not educate their sons are their enemies; for as is
a crane among swans, so are ignorant so are ignorant sons in a public
assembly.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो माता व् पिता अपने बच्चों को शिक्षा नहीं देते है वो तो बच्चों के शत्रु के सामान हैं। क्योंकि वे विद्याहीन बालक विद्वानों की सभा में वैसे ही तिरस्कृत किये जाते हैं जैसे हंसो की सभा मे बगुले।

लालनाद्बहवो दोषास्ताडने बहवो गुणाः ।
तस्मात्पुत्रं च शिष्यं च ताडयेन्न तु लालयेत् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 12)

Meaning in English

Many a bad habit is developed through overindulgence, and many a
good one by chastisement, therefore beat your son as well as your pupil;
never indulge them. (“Spare the rod and spoil the child.”)

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

लाड-प्यार से बच्चों मे गलत आदते ढलती है, उन्हें कड़ी शिक्षा देने से वे अच्छी आदते सीखते है, इसलिए बच्चों को जरुरत पड़ने पर दण्डित करें, ज्यादा लाड ना करें।

श्लोकेन वा तदर्धेन तदर्धार्धाक्षरेण वा ।
अबन्ध्यं दिवसं कुर्याद्दानाध्ययनकर्मभिः ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 13)

Meaning in English

Let not a single day pass without your learning a verse, half a verse, or
a fourth of it, or even one letter of it; nor without attending to charity,
study and other pious activity.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

ऐसा एक भी दिन नहीं जाना चाहिए जब आपने एक श्लोक, आधा श्लोक, चौथाई श्लोक, या श्लोक का केवल एक अक्षर नहीं सीखा, या आपने दान, अभ्यास या कोई पवित्र कार्य नहीं किया।

कान्तावियोगः स्वजनापमानं
ऋणस्य शेषं कुनृपस्य सेवा ।
दारिद्र्यभावाद्विमुखं च मित्रं
विनाग्निना पञ्च दहन्ति कायम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 14)

Meaning in English

Separation from the wife, disgrace from one’s own people, an enemy
saved in battle, service to a wicked king, poverty, and a mismanaged
assembly: these six kinds of evils, if afflicting a person, burn him even
without fire

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

पत्नी का वियोग होना, आपने ही लोगो से बे-इजजत होना, बचा हुआ ऋण, दुष्ट राजा की सेवा करना, गरीबी एवं दरिद्रों की सभा – ये छह बातें शरीर को बिना अग्नि के ही जला देती हैं।

नदीतीरे च ये वृक्षाः परगेहेषु कामिनी ।
मन्त्रहीनाश्च राजानः शीघ्रं नश्यन्त्यसंशयम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 15)

Meaning in English

Trees on a river bank, a woman in another man’s house, and kings
without counsellors go without doubt to swift destruction.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

नदी के किनारे वाले वृक्ष, दुसरे व्यक्ति के घर मे जाने अथवा रहने वाली स्त्री एवं बिना मंत्रियों का राजा – ये सब निश्चय ही शीघ्र नस्ट हो जाते हैं।

बलं विद्या च विप्राणां राज्ञां सैन्यं बलं तथा ।
बलं वित्तं च वैश्यानां शूद्राणां पारिचर्यकम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 16)

Meaning in English

A brahmana’s strength is in his learning, a king’s strength is in his
army, a vaishya’s strength is in his wealth and a shudra’s strength is in
his attitude of service.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

एक ब्राह्मण का बल तेज और विद्या है, एक राजा का बल उसकी सेना मे है, एक वैशय का बल उसकी दौलत मे है तथा एक शुद्र का बल उसकी सेवा परायणता मे है।

निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत् ।
खगा वीतफलं वृक्षं भुक्त्वा चाभ्यागतो गृहम् ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 17)

Meaning in English

The prostitute has to forsake a man who has no money, the subject a
king that cannot defend him, the birds in a tree that bears no fruit, and
the guests in a house after they have finished their meals.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

वेश्या को निर्धन व्यक्ति को त्याग देना चाहिए, प्रजा को पराजित राजा को त्याग देना चाहिए, पक्षियों को फलरहित वृक्ष त्याग देना चाहिए एवं अतिथियों को भोजन करने के पश्चात् मेजबान के घर से निकल देना चाहिए।

गृहीत्वा दक्षिणां विप्रास्त्यजन्ति यजमानकम् ।
प्राप्तविद्या गुरुं शिष्या दग्धारण्यं मृगास्तथा ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 18)

Meaning in English

Brahmanas quit their patrons after receiving alms from them, scholars
leave their teachers after receiving education from them, and animals
desert a forest that has been burnt down.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

ब्राह्मण दक्षिणा मिलने के पश्चात् आपने यजमानो को छोड़ देते है, विद्वान विद्या प्राप्ति के बाद गुरु को छोड़ जाते हैं और पशु जले हुए वन को त्याग देते हैं।

दुराचारी दुरादृष्टिर्दुरावासी च दुर्जनः ।
यन्मैत्री क्रियते पुंभिर्नरः शीघ्रं विनश्यति ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 19)

Meaning in English

He who befriends a man whose conduct is vicious, whose vision
impure, and who is notoriously crooked, is rapidly ruined.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

जो व्यक्ति दुराचारी, कुदृष्टि वाले, एवं बुरे स्थान पर रहने वाले मनुष्य के साथ मित्रता करता है, वह शीघ्र नष्ट हो जाता है।

समाने शोभते प्रीतिः राज्ञि सेवा च शोभते ।
वाणिज्यं व्यवहारेषु दिव्या स्त्री शोभते गृहे ॥

Chanakya Niti (Chap. 2 – Shlok 20)

Meaning in English

Friendship between equals flourishes, service under a king is
respectable, it is good to be business-minded in public dealings, and a
handsome lady is safe in her own home.

भावार्थ हिंदी में (Hindi Meaning)

प्रेम और मित्रता बराबर वालों में अच्छी लगती है, राजा के यहाँ नौकरी करने वाले को ही सम्मान मिलता है, व्यवसायों में वाणिज्य सबसे अच्छा है, अवं उत्तम गुणों वाली स्त्री अपने घर में सुरक्षित रहती है।

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